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यस बैंक का मुनाफा 65% बढ़ा, पर एटी-1 फैसला जोड़ें तो ₹5,200 करोड़ का घाटा

बैंक ने सितंबर तिमाही में ₹1,080 करोड़ कमाए और अनुमानों को पीछे छोड़ा। ऑडिटरों ने नतीजों पर आपत्ति दर्ज की, क्योंकि इनमें ₹8,415 करोड़ के बॉन्ड बहाल करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर शामिल नहीं है।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
रात में मुंबई का लोअर परेल कारोबारी इलाका (फ़ाइल फ़ोटो)
रात में मुंबई का लोअर परेल कारोबारी इलाका (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Whoeverblocksmeisamotherfu*ker / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. जुलाई-सितंबर में यस बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़ रहा।
  2. बैंक के मुताबिक एटी-1 फैसला खातों में दर्ज करने पर तिमाही में करीब ₹5,200 करोड़ का घाटा होगा।
  3. संयुक्त ऑडिटरों ने संशोधित (क्वालिफाइड) निष्कर्ष दिया, क्योंकि इस असर को दर्ज नहीं किया गया है।

यस बैंक ने शनिवार शाम तिमाही मुनाफे में 65% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो अनुमानों से काफी बेहतर है। लेकिन बैंक ने निवेशकों को यह भी बताया कि एटी-1 बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला खातों में दर्ज होते ही यह कमाई खत्म हो जाएगी और बड़ा घाटा बचेगा।

निजी क्षेत्र के इस बैंक का जुलाई-सितंबर का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा ₹1,080 करोड़ रहा, जो एक साल पहले ₹654.47 करोड़ था। समेकित आधार पर उसने ₹1,084.08 करोड़ कमाए। वित्त वर्ष की पहली छमाही का मुनाफा ₹2,150.99 करोड़ रहा। बोर्ड ने शाम 4:30 बजे नतीजों पर विचार शुरू किया और 7:10 बजे बैठक खत्म हुई।

आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे। छह ब्रोकरेज के औसत अनुमान में मुनाफा करीब ₹969 करोड़ आंका गया था।

जिन बॉन्ड को नतीजों में शामिल नहीं किया गया

इन आंकड़ों में सुप्रीम कोर्ट के 15 अक्टूबर के फैसले का असर नहीं है। अदालत ने मार्च 2020 में बैंक के ₹8,415 करोड़ के अतिरिक्त टियर-1 (एटी-1) बॉन्ड बट्टे खाते में डालने के फैसले को पलटने वाले आदेश को सही ठहराया था। यह राइट-डाउन 2020 में बैंक को बचाने की योजना का हिस्सा था।

अपनी फाइलिंग में बैंक ने कहा कि वह अभी फैसले का आकलन कर रहा है और कानूनी सलाहकारों से राय ले रहा है। बैंक ने कहा, “यह विवरण उक्त फैसले के वित्तीय असर को नहीं दर्शाता।”

इसी वजह से बैंक के संयुक्त वैधानिक ऑडिटरों ने नतीजों पर संशोधित (क्वालिफाइड) निष्कर्ष दिया, यानी खातों को लेकर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।

बैंक ने यह भी बताया कि कागज़ पर फैसले का असर क्या होगा। बॉन्ड को शामिल कर दोबारा आंकड़े बनाएं तो सितंबर तिमाही में करीब ₹5,200 करोड़ का शुद्ध घाटा और छमाही में ₹4,146 करोड़ का घाटा दिखेगा। नेटवर्थ ₹53,268 करोड़ से घटकर ₹46,970 करोड़ रह जाएगी, और सालाना आधार पर संपत्ति पर रिटर्न 0.9% से गिरकर माइनस 4.3% हो जाएगा। शुरुआती अनुमान के मुताबिक मूल इक्विटी पूंजी अनुपात पर करीब 250 बेसिस पॉइंट का असर पड़ेगा। इस प्रोफॉर्मा आधार पर बैंक ने अपना पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.5% बताया।

कर्ज साफ, पूंजी पर बादल

अदालती मामले से अलग, तिमाही ठीक-ठाक रही। सकल एनपीए कुल कर्ज का 1.2% यानी ₹3,875.23 करोड़ रहा और शुद्ध एनपीए 0.2%। इस महीने की शुरुआत में जारी अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक कर्ज एक साल में 23.8% बढ़कर ₹3,09,675 करोड़ और जमा 19.5% बढ़कर ₹3,54,084 करोड़ हो गई थी।

निवेशकों की नज़र पूंजी के सवाल पर रहेगी। फैसले के बाद के दो सत्रों में एक समय यस बैंक के शेयर करीब पांचवां हिस्सा गंवा चुके थे, और कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज़ ने इस हफ्ते की शुरुआत में शेयर पर ‘बेचें’ की रेटिंग बरकरार रखी। सोमवार नतीजों के बाद का पहला कारोबारी सत्र होगा।

यस बैंक ने ऐसे दिन नतीजे दिए जब कई बड़े बैंकों के आंकड़े आए। शनिवार को आईसीआईसीआई बैंक का मुनाफा 20%, एक्सिस बैंक का 38% और एचडीएफसी बैंक का 4.7% बढ़ा, जबकि ऊंचे आधार के कारण आईडीबीआई बैंक का मुनाफा 39% घटा।