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कांग्रेस ने एसआईआर पर हमला मुंबई पहुंचाया, महाराष्ट्र में 40 लाख मतदाता जोड़े जाने का आरोप
सी पी जोशी ने चुनाव आयोग से बैठकों के ब्योरे और हटाए गए नामों का डेटा मांगा, जबकि जयराम रमेश ने आयोग पर पुनरीक्षण में इस्तेमाल सॉफ़्टवेयर का नाम छिपाने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें
- वर्षा गायकवाड़ का आरोप है कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच महाराष्ट्र में करीब 40 लाख मतदाता जोड़े गए।
- सी पी जोशी ने चुनाव आयोग से बैठकों के ब्योरे, कानूनी मंज़ूरियां और हटाए गए मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा।
- जयराम रमेश ने कहा कि आयोग ने आरटीआई के जवाब में सॉफ़्टवेयर का नाम बताने से इनकार किया।
कांग्रेस ने रविवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ़ अपना अभियान मुंबई तक पहुंचा दिया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया और दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच के महीनों में महाराष्ट्र की मतदाता सूची में करीब 40 लाख मतदाता जोड़े गए।
पार्टी के “वोट बचाओ, देश बचाओ” अभियान के तहत हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ नेता सी पी जोशी ने मांग की कि चुनाव आयोग अपनी बैठकों के ब्योरे, अपने फ़ैसलों के पीछे की कानूनी मंज़ूरियां और हटाए गए हर मतदाता की जानकारी सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि नाम जोड़ने, आपत्ति करने और सुधार के लिए इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्म 6, 7 और 8 नियमों का उल्लंघन कर बदले गए, और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के अधिकार आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को सौंप दिए गए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बिहार में करीब 47 लाख और पश्चिम बंगाल में 90 लाख से ज़्यादा नाम हटाए गए।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि ये 40 लाख नाम पांच-छह महीनों में जोड़े गए, यानी हर मतदान केंद्र पर करीब 400 मतदाता, और एसआईआर में मुंबई की सूची से लाखों लोग छूट गए। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गड़बड़ियों के ज़रिए सत्ता में आई।
आयोग कह चुका है कि एसआईआर से जुड़े फ़ैसले तीनों आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंज़ूर किए, और किसी भी संस्था के विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना सामान्य बात है।
इससे पहले दिन में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आयोग पर आरोप लगाया कि सूची की गड़बड़ियां पकड़ने वाले सॉफ़्टवेयर का नाम और संस्करण उसने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के एक आवेदन के जवाब में बताने से इनकार कर दिया, और इसके लिए व्यावसायिक गोपनीयता और ट्रेड सीक्रेट का हवाला दिया। उन्होंने पूछा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ ने ईसीआईनेट प्लेटफ़ॉर्म बनाया, यह बात कंपनी के अपने खुलासों से क्यों सामने आई, और क्या इसमें आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हुआ।
रमेश ने एक्स पर लिखा, “जनता जानती है कि बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है। ज्ञानेश कुमार को जाना होगा। एसआईआर को तुरंत रोका जाए।”
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