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जयराम रमेश बोले, मतदाता सूची की गड़बड़ी का जवाब सॉफ्टवेयर नहीं, चुनाव आयोग दे
कांग्रेस सांसद ने शुक्रवार के उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की सूचियों में अजीबोगरीब नामों और पीलीभीत में बदली गई 10,470 प्रविष्टियों का मुद्दा उठाया।

मुख्य बातें
- जयराम रमेश ने आयोग पर मतदाता सूची की गलतियों का दोष सॉफ्टवेयर और ईसीआईनेट पर डालने का आरोप लगाया।
- उन्होंने कहा कि पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं का ब्योरा बिना सहायक रिकॉर्ड के फॉर्म 8 से बदला गया।
- शुक्रवार को हुए यूपी की दो परिषद सीटों के मतों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शनिवार को चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों में गड़बड़ियां सामने आने के बाद वह अपने सॉफ्टवेयर की आड़ ले रहा है।
रमेश एक चुनाव अधिकारी की उस सफाई का जवाब दे रहे थे, जिसमें शुक्रवार के विधान परिषद चुनाव की सूचियों में अजीब प्रविष्टियों के लिए सॉफ्टवेयर की खराबी को जिम्मेदार बताया गया था। उन्होंने जिन नामों की ओर ध्यान दिलाया, उनमें “राम ने यादव को मारा” और “मूर्ख चंद्र यादव” शामिल हैं।
रमेश ने एक्स पर लिखा, “चुनाव आयोग एक सोची-समझी साजिश का दोष टालने की कोशिश कर रहा है।” उन्होंने पूछा, “क्या भारत के लोकतंत्र और मतदाता सूची की शुचिता को पूरी तरह सॉफ्टवेयर और ईसीआईनेट के भरोसे छोड़ दिया गया है?” ईसीआईनेट चुनाव सेवाओं के लिए आयोग का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
उन्होंने कहा, “जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, सॉफ्टवेयर की नहीं।” उनका आरोप है कि ये गड़बड़ियां भाजपा को फायदा पहुंचाने की साजिश का हिस्सा हैं।
पीलीभीत और एसआईआर
रमेश ने कहा कि पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं का ब्योरा फॉर्म 8 के जरिए, जो प्रविष्टि सुधारने या स्थानांतरित करने का फॉर्म है, बिना किसी सहायक रिकॉर्ड के बदल दिया गया। उनके मुताबिक, प्रभावित मतदाताओं में ज्यादातर एक ही समुदाय के हैं।
उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद की समस्याएं भी गिनाईं: नाम गायब होना, और ईपीआईसी नंबर से खोजने पर गलत ब्योरा आना। उन्होंने कहा कि आयोग ने अब तक कांग्रेस और राहुल गांधी को वह मशीन से पढ़ा जा सकने वाला मतदाता डेटा नहीं दिया, जो उन्होंने मांगा था।
रमेश ने कहा, “जिस एसआईआर का घोषित मकसद मतदाता सूचियों को शुद्ध करना था, उसी ने उनकी विश्वसनीयता पर संदेह पैदा कर दिया है।” उन्होंने कहा, “हमारी साफ मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें।”
शनिवार दोपहर तक चुनाव आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया था। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक सीट और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट के मतों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी।