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दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को दी मंजूरी

अनापत्ति प्रमाणपत्र 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक के लिए है। इंडिया गठबंधन के मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ मिलकर अभियान चलाने पर सहमत होने के बाद खरगे ने रैली का एलान किया था।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली का रामलीला मैदान (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली का रामलीला मैदान (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Hemant banswal / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया।
  2. एनओसी 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मान्य है।
  3. जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद रामलीला मैदान नामित स्थलों में शामिल है।

दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस को 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने की अनुमति दे दी है। चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन शुरू होने के बाद यह राजधानी में पार्टी का सबसे बड़ा प्रस्तावित शक्ति प्रदर्शन है।

पुलिस उपायुक्त (मध्य) रोहित राजबीर सिंह ने शनिवार को बताया कि कांग्रेस ने अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, “तय विरोध स्थल पर रैली करने के लिए 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक की अवधि का NOC जारी किया गया है।”

पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था और मैदान के आसपास यातायात संभालने के लिए वह आयोजकों, यातायात पुलिस और दूसरी एजेंसियों के लगातार संपर्क में है।

इस महीने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने जिन तीन जगहों को नामित किया, उनमें बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड के साथ रामलीला मैदान भी है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस रैली का एलान 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद किया था, जिसमें दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ रैलियों और “लोकतंत्र बचाओ” मार्च के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि दल इस पर भी सहमत हैं कि चुनाव ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से हों।

विपक्ष उन खबरों को भी मुद्दा बना रहा है जिनके मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन एसआईआर फैसलों पर औपचारिक आपत्ति जताई जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए। आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय होना सामान्य है और उसके सभी आदेशों का पूरा कानूनी आधार है।