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खड़गे बोले, बुधवार को मोदी के सामने रखूंगा एसआईआर और परिसीमन की चिंताएं
किरेन रिजिजू के जवाब के एक दिन बाद कलबुर्गी में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास उनकी दो चिट्ठियां हैं। जयराम रमेश ने पूछा कि क्या सरकार के पास परिसीमन का कोई नया प्रस्ताव है भी।

मुख्य बातें
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वे 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को "एसआईआर से हुए नुकसान" के बारे में बताएंगे।
- जयराम रमेश के मुताबिक कांग्रेस परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग छह बार लिखित में कर चुकी है।
- रमेश ने पूछा कि 17 अप्रैल को विधेयक गिरने के बाद क्या सरकार के पास कोई ठोस नया प्रस्ताव है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कहा कि वे बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), परिसीमन और महिला आरक्षण पर अपनी आपत्तियां रखेंगे। उनकी पार्टी किसी भी नए परिसीमन विधेयक से पहले सर्वदलीय बैठक के लिए दबाव बनाए हुए है।
खड़गे ने अपने गृह जिले कर्नाटक के कलबुर्गी में पत्रकारों से कहा, “एसआईआर से हुए नुकसान समेत मैं कल उन्हें सब कुछ समझाऊंगा।” उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री को लिखा है और मोदी के पास “मेरी दो चिट्ठियां हैं”। उन्होंने यह नहीं बताया कि वे मोदी से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे या नहीं, और उस दिन इससे आगे बोलने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “मैं आज राजनीति पर बात नहीं करना चाहता।”
रिजिजू का जवाब
खड़गे की यह टिप्पणी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस जवाब के एक दिन बाद आई, जो उन्होंने खड़गे की 16 अक्टूबर की चिट्ठी पर दिया। उस चिट्ठी में संसद में परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग की गई थी।
रिजिजू ने लिखा कि सरकार ने मार्च और अप्रैल में चिट्ठियों के जरिए और खड़गे व राहुल गांधी से बातचीत में कांग्रेस का सहयोग मांगा था। उनके मुताबिक कांग्रेस ने तारीखें नहीं दीं, इसलिए सरकार ने दूसरे दलों से सलाह की, जिनमें डीएमके, सपा, वाईएसआरसीपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी शामिल हैं। 13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद से संसद का सत्रावसान न होने पर प्रक्रियागत गड़बड़ी के आरोप को भी उन्होंने खारिज किया और कहा कि संविधान में सत्रावसान की कोई तय अवधि नहीं है। उन्होंने कांग्रेस से विधेयकों में रुकावट न डालने की अपील की।
रमेश के सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार दोपहर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रिजिजू ने “मार्च 2026 में कुछ राजनीतिक दलों से परिसीमन पर चुनिंदा सलाह-मशविरे” का जिक्र तो किया, पर “उन बातचीतों में किए गए वे वादे छोड़ दिए जो संविधान संशोधन विधेयक में नहीं थे”।
रमेश ने लिखा, “17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में विधेयक उचित ही और निर्णायक रूप से गिर गया।” उन्होंने कहा कि रिजिजू ने जिन दलों से सलाह की बात कही, उनमें से ज्यादातर ने विधेयक के खिलाफ वोट दिया था। उन्होंने बताया कि खड़गे अब तक छह बार लिखित में सर्वदलीय बैठक मांग चुके हैं, चार बार प्रधानमंत्री से और दो बार रिजिजू से।
रमेश ने पूछा, “क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन का कोई ठोस नया प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी दल से चर्चा की हो?” उन्होंने पूछा, “मोदी सरकार परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने से जिद्दी ढंग से इनकार क्यों कर रही है?” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार विधेयक को फिर लाकर “बेहद दागदार दो-तिहाई बहुमत” से पारित कराना चाहती है, जो “निस्संदेह फिर नाकाम होगा”।
यह क्यों अहम है
परिसीमन, यानी जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों का नए सिरे से निर्धारण, यह तय करता है कि उत्तर और दक्षिण के बीच राजनीतिक ताकत कैसे बंटेगी, और इसके लिए संविधान संशोधन में सरकार को दो-तिहाई बहुमत चाहिए। सीटों की यह लड़ाई अब एसआईआर के खिलाफ विपक्ष के अभियान के साथ चल रही है, जिसे किसान और ट्रेड यूनियन संगठन शुक्रवार, 23 अक्टूबर को देश भर के जिला मुख्यालयों तक ले जाने की तैयारी में हैं।
सरकार ने यह नहीं बताया है कि वह नया परिसीमन विधेयक कब लाएगी, या प्रधानमंत्री खड़गे से मिलेंगे या नहीं।