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23 अक्टूबर को एसआईआर के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन में उतरेगी किसान सभा, कहा: लोकतंत्र सबसे जरूरी सवाल

किसान, मजदूर, छात्र और महिला संगठन जिला स्तर पर प्रदर्शन करेंगे, जिनमें पुनरीक्षण खत्म करने और सीईसी को हटाने की मांग होगी। एआईकेएस नवंबर में नलगोंडा में अपना 90वां साल मनाएगी।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले (फ़ाइल फ़ोटो)
अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: NewsClick / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. अखिल भारतीय किसान सभा एसआईआर के खिलाफ 23 अक्टूबर के देशव्यापी प्रदर्शनों में शामिल होगी।
  2. प्रदर्शनकारी एसआईआर रद्द करने, सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयुक्तों के चयन का तरीका बदलने की मांग कर रहे हैं।
  3. एआईकेएस का 36वां सम्मेलन 15 से 18 नवंबर तक नलगोंडा में होगा।

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ 23 अक्टूबर को होने वाले देशव्यापी प्रदर्शनों में शामिल होगी। संगठन के नेताओं ने शुक्रवार को नई दिल्ली में यह एलान किया। इससे देश के सबसे पुराने किसान संगठनों में से एक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान में उतर आया है।

संयुक्त किसान मोर्चा और दूसरे समूहों के बुलाए ये प्रदर्शन जिला और स्थानीय स्तर पर होंगे, जिनमें किसान, ट्रेड यूनियन और छात्र, युवा व महिला संगठन एक साथ आएंगे। मांगें हैं कि एसआईआर रद्द हो, कुमार को हटाया जाए और चुनाव आयुक्तों के चयन का तरीका बदला जाए।

एआईकेएस अध्यक्ष अशोक धवले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आज सबसे जरूरी सवाल लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का है।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में चुनावी प्रक्रिया को भ्रष्ट कर दिया गया है।

महासचिव विजू कृष्णन ने कहा कि कृषि संकट “मोदी सरकार के 12 सालों में गहराया है”। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत कृषि आयात के लिए भारतीय बाजार खोलने से, जहां किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है, देश के किसानों, डेयरी उत्पादकों, बागवानों और मछुआरों को नुकसान होगा।

नब्बे साल का सफर

11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में बनी एआईकेएस, जो 1.58 करोड़ से ज्यादा सदस्य होने का दावा करती है, 15 से 18 नवंबर तक तेलंगाना के नलगोंडा में अपना 36वां अखिल भारतीय सम्मेलन करेगी। इसमें 800 से ज्यादा प्रतिनिधियों और पर्यवेक्षकों के आने की उम्मीद है। सम्मेलन की शुरुआत 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर एक लाख किसानों की रैली से होगी, और संगठन ने उस दिन देश भर के गांवों में अपना झंडा फहराने को कहा है।

यह जगह तेलंगाना के सशस्त्र किसान संघर्ष की 80वीं वर्षगांठ से जुड़ी है। एआईकेएस ने भाजपा और आरएसएस पर उस आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश का आरोप लगाया। उसके मुताबिक यह एक वर्ग संघर्ष था, जिसने जमींदारों और निजाम के शासन के खिलाफ हिंदू और मुसलमान किसानों को एकजुट किया।