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डीएमके ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और बैलट पेपर की वापसी मांगी, कांग्रेस और टीवीके पर भी साधा निशाना
चेन्नई में एम के स्टालिन की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों की बैठक ने शनिवार को चार प्रस्ताव पास किए। इनमें मतदाता सूची पुनरीक्षण वापस लेने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देना शामिल है।

मुख्य बातें
- डीएमके सांसदों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने और उनके आचरण की जांच की मांग की।
- पार्टी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से एसआईआर रद्द करने और बैलट पेपर लौटाने की मांग करेगी।
- उसने कांग्रेस और विजय की टीवीके पर एसआईआर को लेकर विरोधाभासी रुख का आरोप लगाया।
डीएमके ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने और उनके आचरण की जांच की मांग की। पार्टी ने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) वापस लेने और बैलट पेपर से चुनाव कराने की भी मांग रखी।
ये मांगें चेन्नई में डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में पार्टी अध्यक्ष एम के स्टालिन की अध्यक्षता में हुई सांसदों की बैठक में पास चार प्रस्तावों में रखी गईं। पार्टी ने कुमार को उस पुनरीक्षण के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिससे उसके मुताबिक योग्य मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं।
राष्ट्रपति को ज्ञापन
डीएमके राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को औपचारिक ज्ञापन देगी। उसकी मांग है कि एसआईआर वापस लिया जाए, आने वाले चुनाव पुनरीक्षण से पहले की सूची पर कराए जाएं, ईवीएम का इस्तेमाल बंद हो और बैलट पेपर लौटें। पार्टी ने यह भी कहा कि नवंबर-दिसंबर के मानसून और त्योहारों के मौसम में यह काम कराने से मतदाताओं को व्यावहारिक दिक्कतें होंगी।
चौथे प्रस्ताव में पुनरीक्षण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों और दूसरे समूहों का समर्थन किया गया, और कहा गया कि डीएमके एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शनों का साथ देती रहेगी।
सहयोगियों और प्रतिद्वंद्वियों पर वार
बैठक में सबसे तीखी बातें उन दलों के लिए कही गईं जो चुनाव आयोग के विरोध में उसके साथ हैं। डीएमके ने सवाल उठाया कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर का विरोध करते हुए केरल और तमिलनाडु में अलग-अलग रुख कैसे अपना सकती है। पार्टी ने कहा कि सूची की गड़बड़ियों से हर राज्य में एक जैसे निपटा जाना चाहिए।
उसने कहा कि अभिनेता से नेता बने विजय की टीवीके ने न तो खुलकर कुमार को हटाने की मांग की है, न एसआईआर के खिलाफ पर्याप्त मजबूत रुख लिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ लोग निजी राजनीतिक फायदे के लिए टीवीके को बढ़ावा दे रहे हैं। उसने दोनों दलों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि वे डीएमके से टकराव मोल न लें।
लंबी लड़ाई
स्टालिन जुलाई 2025 से यह मुद्दा उठा रहे हैं, जब उन्होंने बिहार में मतदाताओं के नाम कटने पर आवाज उठाई थी और कनिमोझी करुणानिधि के साथ वहां वोटर अधिकार यात्रा में शामिल हुए थे। 2025 के बिहार विधानसभा नतीजों के बाद उन्होंने विपक्षी गठबंधन की कमियों की आलोचना की थी, लेकिन कहा था कि इससे चुनाव आयोग की कथित नाकामियां माफ नहीं हो जातीं।
एसआईआर में मसौदा सूचियों से कम से कम 13 करोड़ नाम कटे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस हफ्ते राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और दूसरे इंडिया गठबंधन नेताओं की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप है कि कुमार ने बाकी दो आयुक्तों के बिना फैसले लिए। अदालत कुमार के फैसलों को दी गई चुनौतियों पर 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।