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बागी तृणमूल सांसदों के लिए आज स्पीकर की समय सीमा, अयोग्यता याचिकाओं पर देना है जवाब
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में गए 20 सांसदों को तीन बार की मोहलत और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद मंगलवार तक अभिषेक बनर्जी की दलबदल-विरोधी याचिकाओं का जवाब देना है।

मुख्य बातें
- 20 बागी सांसदों को मंगलवार, 20 अक्टूबर तक अयोग्यता याचिकाओं का जवाब देना है।
- स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय ने 11 अक्टूबर को यह तारीख दी, जो सांसदों की मांग से दो दिन कम है।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से याचिकाओं पर "शीघ्रता से" फैसला करने को कहा है।
जून में ममता बनर्जी की पार्टी छोड़ने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के पास लोकसभा से उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं का जवाब देने के लिए मंगलवार आखिरी दिन है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय ने 11 अक्टूबर को 20 अक्टूबर की समय सीमा तय की थी, जबकि सांसदों ने 22 अक्टूबर तक का समय मांगा था। यह कई बार दी गई मोहलतों में ताजा थी। स्पीकर ने पहले नोटिस जारी किए और फिर 25 सितंबर को समूह को 8 अक्टूबर तक का समय दिया। उस दिन सांसदों ने फिर पत्र लिखकर दो हफ्ते और मांगे और कहा कि उनके वकील अभी दस्तावेज जुटा रहे हैं।
याचिकाएं 18 जून को ममता बनर्जी गुट का नेतृत्व कर रहे अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा सदस्य (दलबदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985 के तहत दायर की थीं। इससे पहले 14 जून को बागियों ने स्पीकर से मुलाकात के बाद घोषणा की थी कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करेंगे। यह एक कम जानी-पहचानी पार्टी है जो भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करती है।
तृणमूल के 27 लोकसभा सदस्यों में से 20 ये बागी कहते हैं कि उनका कदम अयोग्यता के दायरे में नहीं आता और पार्टी नेतृत्व पर भरोसा खोने के बाद उन्हें अलग राजनीतिक पहचान का हक है। ममता खेमा इसे दसवीं अनुसूची के तहत सुनियोजित दलबदल बताता है। तृणमूल नेता कुणाल घोष ने उन पर भाजपा के हित साधने का आरोप लगाया है।
संसदीय रिकॉर्ड में ये 20 सांसद अब भी तृणमूल के सदस्य दर्ज हैं, हालांकि मानसून सत्र से पहले उन्हें अलग बैठने की जगह दी गई थी।
अभिषेक बनर्जी देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं। 25 सितंबर को अदालत ने टिप्पणी की थी कि स्पीकर को याचिकाओं का “शीघ्रता से” निपटारा करना चाहिए। अदालत 26 अक्टूबर को दशहरा अवकाश के बाद खुलेगी।
सांसद मंगलवार को जवाब दाखिल करें या और समय मांगें, अगला कदम स्पीकर को ही उठाना है। इसका असर बंगाल से आगे तक है: ऐसे समय जब सरकार के परिसीमन विधेयक दोबारा लाने की चर्चा है, इस गुट के 20 वोट लोकसभा में एनडीए की ताकत पर असर डालते हैं।