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दशहरा अवकाश में सुप्रीम कोर्ट सुनेगा पिनराई विजयन की एफआईआर आदेश के खिलाफ याचिका
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में विजिलेंस केस दर्ज करने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार की चुनौती पर बुधवार को सुनवाई होनी है।

मुख्य बातें
- पिनराई विजयन और उनके परिवार की याचिकाओं पर बुधवार, 21 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
- याचिकाएं ईडी की रिपोर्ट पर विजिलेंस केस दर्ज करने के 9 अक्टूबर के हाई कोर्ट आदेश को चुनौती देती हैं।
- विजयन के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके परिवार की उन याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है, जो सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में उनके खिलाफ विजिलेंस केस शुरू कराने वाले हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ हैं।
दशहरा अवकाश के दौरान यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के शुक्रवार के उस आश्वासन के बाद हो रही है कि वे जजों की उपलब्धता के हिसाब से मामले को विशेष अवकाश पीठ के सामने रखने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसा न हो सका तो “मामला 26 अक्टूबर को सूचीबद्ध होगा”, जब नियमित पीठें लौटेंगी।
विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और मोहम्मद रियास ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वे 9 अक्टूबर के एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दे रहे हैं जिसमें राज्य के विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पुलिस को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर को उनकी अपीलें खारिज कर दी थीं, हालांकि दूसरे उपाय अपनाने का रास्ता खुला छोड़ा था।
पिछले हफ्ते जल्द सुनवाई की मांग करते हुए विजयन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ से कहा, “हम गिरफ्तारी या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा मांग रहे हैं।” उन्होंने जोड़ा, “यह स्वतंत्रता का मामला है।”
लूथरा का तर्क है कि एकल पीठ का आदेश जनहित याचिका जैसी कार्यवाही में दिया गया। उन्होंने खंडपीठ की इस राय पर भी आपत्ति जताई है कि “एफआईआर दर्ज होने से पहले सुनवाई का कोई अधिकार नहीं है”।
मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से वीणा की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए भुगतानों से जुड़ा है। केरलम में यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जहां कुछ कांग्रेस नेताओं ने एफआईआर की जगह प्रारंभिक जांच चुनने के यूडीएफ सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधायक चांडी ओमन ने सप्ताहांत में कहा था कि विजयन को उस तरह “परेशान” नहीं किया जाना चाहिए जैसे उनके पिता, दिवंगत ओमन चांडी को किया गया था।