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फ़ार्मा शेयरों और थोक महंगाई के दबाव में सेंसेक्स 252 अंक फिसला

आईटी और एफ़एमसीजी शेयर चढ़े, लेकिन दवा कंपनियों का बाज़ार मूल्य ₹25,169 करोड़ घट गया। रुपया लगातार चौथे दिन मज़बूत होकर करीब 95.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज
मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंजWikimedia commons / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. सेंसेक्स 251.89 अंक गिरकर 72,781.89 पर और निफ्टी 99.25 अंक गिरकर 22,622.70 पर बंद हुआ।
  2. सुप्रीम कोर्ट में दवा कीमतों के मामले के असर से निफ्टी फ़ार्मा सूचकांक 1.3% टूटा।
  3. आरबीआई की सट्टेबाज़ी पर रोक के कदमों से रुपया लगातार चौथे सत्र में मज़बूत हुआ।

उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ार गिरावट के साथ बंद हुए। दवा कंपनियों और वित्तीय शेयरों में बिकवाली रही, और थोक महंगाई के उम्मीद से तेज़ उछाल ने बॉन्ड यील्ड बढ़ा दी। आईटी और उपभोक्ता सामान कंपनियों की बढ़त ने नुकसान को सीमित रखा।

बीएसई सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34% गिरकर 72,781.89 पर बंद हुआ और मंगलवार की 1,109 अंकों की तेज़ी का एक हिस्सा गंवा दिया। एनएसई निफ्टी 50 99.25 अंक यानी 0.44% गिरकर 22,622.70 पर आ गया।

दवा कंपनियों पर मार

निफ्टी फ़ार्मा सूचकांक सबसे कमज़ोर रहा, 1.3% गिरकर 25,738.95 पर, और हेल्थकेयर सूचकांक 1.25% फिसला। फ़ार्मा सूचकांक के 20 शेयरों का कुल बाज़ार मूल्य ₹25,169 करोड़ घट गया।

यह बिकवाली इस हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट के उन सवालों के बाद आई कि दवाओं पर सरकार के ट्रेड मार्जिन नियंत्रण का दायरा कितना हो। केंद्र ने अदालत से कहा है कि वह कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित करने की योजना बना रहा है। मोतीलाल ओसवाल के सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “अलग-अलग कंपनियों पर सीधा असर आखिरकार होने वाले नीतिगत बदलावों पर निर्भर करेगा।”

सेंसेक्स को सबसे ज़्यादा नीचे खींचने वालों में बजाज फ़ाइनेंस, बजाज फ़िनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटरनल और आईसीआईसीआई बैंक रहे। निफ्टी में श्रीराम फ़ाइनेंस और एचडीएफ़सी लाइफ़ सबसे ज़्यादा गिरने वालों में थे।

आईटी और एफ़एमसीजी में तेज़ी

निफ्टी एफ़एमसीजी सूचकांक 1.21% चढ़ा, जिसमें नेस्ले इंडिया 3.69% और टाटा कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स 2.91% ऊपर रहे। गुरुवार को विप्रो और टेक महिंद्रा के नतीजों से पहले आईटी सूचकांक 1.14% चढ़ा और उसके बाज़ार मूल्य में ₹25,029 करोड़ जुड़े, लगभग उतने ही जितने फ़ार्मा ने गंवाए। सेंसेक्स में इन्फ़ोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ बढ़त वालों में रहे।

सैमको सिक्योरिटीज़ के ओम मेहरा ने आईटी की इस उछाल को ज़्यादा अहमियत न देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “मुख्य रुझान अब भी नीचे की ओर है, क्योंकि सूचकांक अभी 32,000 से नीचे है।”

महंगाई और यील्ड

दोपहर में आए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में थोक महंगाई अनुमानों से काफ़ी ऊपर 11.39% पर पहुंच गई। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “उम्मीद से ज़्यादा गर्म घरेलू डब्ल्यूपीआई आंकड़े ने बॉन्ड यील्ड ऊपर धकेल दी।” उन्होंने कहा कि इससे मौद्रिक नीति के और सख़्त होने की चिंता बढ़ी।

एक्सचेंज के अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को ₹1,857.44 करोड़ के शेयर शुद्ध रूप से बेचे। इस साल वे भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड रकम निकाल चुके हैं।

एसबीआई सिक्योरिटीज़ के सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी एक दायरे में अटका है। उन्होंने कहा, “अगली दिशा तय करने के लिए एक निर्णायक ब्रेकआउट ज़रूरी है।” उनके मुताबिक 22,480 से 22,500 पर सपोर्ट और 22,770 से 22,800 पर रेज़िस्टेंस है।

रुपया फिर मज़बूत

रुपया लगातार चौथे सत्र में चढ़ा और मंगलवार के 95.28 के मुकाबले करीब 95.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। दिन में यह 94.76 तक गया। एक हफ़्ते में रुपया करीब 1.7% मज़बूत हुआ है। इसमें रिज़र्व बैंक के 10 अक्टूबर के कदमों से मदद मिली, जिनमें तेल कंपनियों के लिए डॉलर की विशेष खिड़की और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव पर सख़्त नियम शामिल हैं।

मिरे एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा, “रुपये में अत्यधिक सट्टेबाज़ी रोकने के लिए आरबीआई के हस्तक्षेप से हमें रुपये के सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करने की उम्मीद है।” उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और एफ़आईआई की निकासी तेज़ बढ़त को सीमित कर सकती हैं।” ब्रेंट क्रूड वायदा 0.64% ऊपर 106.37 डॉलर प्रति बैरल पर था।

साल की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.55% कमज़ोर है।