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दिल्ली एसआईआर में कटे नाम फॉर्म 6 भरकर फिर जुड़वा सकते हैं मतदाता: चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से कहा

घर बदलने के कारण गणना से छूटे दो मतदाता अपनी पुरानी प्रविष्टि बहाल कराना चाहते थे। अदालत ने मामला बंद करते हुए कहा कि झूठी घोषणा का उनका डर बेबुनियाद है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
दिल्ली हाईकोर्ट का एक सभागार (फ़ाइल फ़ोटो)
दिल्ली हाईकोर्ट का एक सभागार (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Surance / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि जिनके नाम कटे हैं वे फॉर्म 6 भरकर राहत पा सकते हैं।
  2. याचिकाकर्ता नया आवेदन करने के बजाय फॉर्म 8 से अपनी प्रविष्टि बहाल कराना चाहते थे।
  3. जस्टिस दिनेश मेहता और अदिति चौधरी की बेंच ने मामला बंद किया और मतदाताओं के डर को 'बेबुनियाद' बताया।

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गणना न हो पाने के कारण जिन मतदाताओं के नाम सूची से कट गए, वे नया फॉर्म 6 भरकर दोबारा सूची में आ सकते हैं। चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट को यह बताया है।

यह बयान दो मतदाताओं की याचिका पर आया, जो अपने पुराने पते से जा चुके थे और इसलिए एसआईआर के दौरान गणना फॉर्म नहीं भर सके। उनके नाम हटा दिए गए। उन्होंने गणना से छूटे मौजूदा मतदाताओं के लिए आयोग की प्रक्रिया को चुनौती दी और मांग की कि नए सिरे से नाम जुड़वाने के बजाय उनकी पुरानी प्रविष्टि फॉर्म 8 के जरिए बहाल और ठीक की जाए। फॉर्म 8 प्रविष्टि बदलने या सुधारने के लिए होता है।

फॉर्म 6 को लेकर डर

फॉर्म 6 मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने का वैधानिक आवेदन है, और आवेदक को घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार आवेदन कर रहा है। झूठी घोषणा पर दंड हो सकता है, इसलिए याचिकाकर्ता इससे हिचक रहे थे।

आयोग के स्थायी वकील ने निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के निर्देश पर कहा कि याचिकाकर्ता मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फॉर्म 6 भरकर राहत पा सकते हैं। वकील ने कहा कि अधिकारी उनकी मदद करेंगे, लेकिन उन्होंने यह मदद मांगी ही नहीं।

जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की बेंच ने कहा कि झूठी घोषणा के आरोप का याचिकाकर्ता का डर “बेबुनियाद” है। बेंच ने कहा, “याचिकाकर्ता चाहें तो फॉर्म 6 भर सकते हैं, जिस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।” रविवार को सार्वजनिक हुए आदेश में अदालत ने रिट कार्यवाही बंद कर दी।

यह क्यों अहम है

यह आदेश दिल्ली पुनरीक्षण में सूची से बाहर हुए मतदाताओं को वापसी का रास्ता देता है, जहां बूथ स्तर के अधिकारी मसौदा सूची से छूटे 47 लाख मतदाताओं की दोबारा जांच कर रहे हैं। नया फॉर्म 6 खुद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के घेरे में है, जिसने इसी महीने कहा कि उसने इस पर कभी फैसला नहीं दिया और वह इसकी जांच करेगा।