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मतदाता सूची के दोबारा पुनरीक्षण पर असम कांग्रेस सभी 31,486 बूथों पर तैनात करेगी 'वोट रक्षक'
पार्टी का कहना है कि साल के दूसरे संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान वह हर मतदान केंद्र और नगर वार्ड पर नज़र रखेगी। राज्य के 35 ज़िलों में 100 से ज़्यादा पर्यवेक्षक भेजे गए हैं।

मुख्य बातें
- असम कांग्रेस 31,486 मतदान केंद्रों में से हर एक और 669 नगर वार्डों के लिए एक 'वोट रक्षक' नियुक्त करेगी।
- नए संक्षिप्त पुनरीक्षण के बाद राज्य की अंतिम मतदाता सूची नवंबर 2026 में आनी है।
- प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने एआईसीसी के सात पर्यवेक्षकों के अलावा 102 पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं।
असम में कांग्रेस राज्य के सभी 31,486 मतदान केंद्रों और 669 नगर वार्डों पर एक-एक “वोट रक्षक” तैनात करेगी, जो मतदाता सूची के ताज़ा पुनरीक्षण पर नज़र रखेगा। पार्टी नेताओं ने शनिवार को गुवाहाटी में यह जानकारी दी।
यह पार्टी के “वोट बचाओ, देश बचाओ” अभियान का हिस्सा है, जो उसके मुताबिक सभी 35 ज़िलों और 301 प्रखंडों तक पहुंचेगा। एआईसीसी ने सात वरिष्ठ पर्यवेक्षक भेजे हैं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 102 और पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं।
असम ने 5 फरवरी को मसौदा सूची जारी की थी। करीब आठ महीने बाद चुनाव आयोग ने दूसरा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण शुरू कराया, और अंतिम सूची अब नवंबर 2026 में आनी है।
‘दोबारा शुरू करने को मजबूर’
पार्टी के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में पूर्व विधायक सत्यब्रत कलिता ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “ज्ञानेश कुमार, जो कथित तौर पर भारत रत्न के हकदार हैं, को एक बार फिर विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण शुरू करने पर मजबूर होना पड़ा।”
उनका कहना था कि यह खामी पिछले चुनाव की बुनियाद तक जाती है। कलिता ने कहा, “गलत मतदाता सूची पर कराया गया चुनाव कभी वैध नहीं हो सकता। यह सरकार पूरी तरह अवैध है। अगर मुख्यमंत्री के मन में लोकतंत्र और जनता के लिए थोड़ा भी सम्मान है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।”
कलिता ने राज्य के विशेष जांच दल (एसआईटी) पर भी हमला किया। उसकी एक जांच के बारे में उन्होंने कहा, “दावा किया गया था कि एसआईटी वाटरटाइट चार्जशीट दाखिल करेगी, लेकिन अब वह पानी रिसकर बाढ़ बन गया है।”
पार्टी किन नियमों पर नज़र रख रही है
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव (प्रशासन) बिपुल गोगोई ने कहा कि पार्टी ने ज़्यादा प्रचार की मांग की थी और हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 होर्डिंग लगाने को कहा था। नेताओं के मुताबिक आयोग ने बजट की सीमा का हवाला दिया और अपना प्रचार प्रेस वार्ताओं और सोशल मीडिया तक सीमित रखा।
उन्होंने इस दौर के दो और बदलावों की ओर इशारा किया। अब कोई एक व्यक्ति ज़्यादा से ज़्यादा 10 लोगों के खिलाफ शिकायत या आपत्ति दर्ज करा सकता है। और पुनरीक्षण का काम पहले की तरह सर्कल अधिकारियों के बजाय ज़िला आयुक्त के दफ्तर से चलाया जा रहा है।
बिपुल गोगोई ने कहा, “भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक और स्वतंत्र संस्था है। इसमें बाहरी दखल नहीं होना चाहिए।” एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को याद करते हुए उन्होंने जोड़ा, “टी एन शेषन जैसा मज़बूत और निष्पक्ष व्यक्ति ही चुनाव आयोग की गरिमा बनाए रख सकता है।”
पार्टी ने यह नहीं बताया कि वोट रक्षक कब तक तैनात हो जाएंगे। शनिवार रात तक चुनाव आयोग की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
असम का यह अभियान चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन की राष्ट्रीय मुहिम के साथ चल रहा है, जो 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की ओर बढ़ रही है।