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सीजेआई पर टिप्पणी: संजय राउत और निखिल वागले पर अवमानना केस को अटॉर्नी जनरल की मंजूरी

आर. वेंकटरमणी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत पर दोनों की पोस्ट को 'प्रथम दृष्टया अपमानजनक' बताया। वागले माफी मांगकर पोस्ट हटा चुके हैं, राउत की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले (फ़ाइल फ़ोटो)
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Bollywood Hungama / Wikimedia Commons; Ravivyas93 / Wikimedia Commons, CC BY 3.0 and CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने एससीबीए की याचिका दाखिल होने के दिन ही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की मंजूरी दे दी।
  2. उन्होंने कहा कि जजों के भाजपा कार्यक्रमों और दावतों में जाने के राउत के दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
  3. पत्रकार निखिल वागले ने गुरुवार को बिना शर्त माफी मांगी और अपनी पोस्ट हटा दी।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) को शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत पर दोनों की टिप्पणियों से जुड़ा है।

एससीबीए ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को याचिका दाखिल की और अटॉर्नी जनरल ने उसी दिन मंजूरी दे दी। अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत किसी निजी पक्ष को सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करवाने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति ज़रूरी होती है। याचिका अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।

क्या कहा गया था

दोनों ने चीफ जस्टिस के उस फैसले पर प्रतिक्रिया दी थी, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से व्यक्तिगत रूप से मिलने से इनकार कर दिया था। सीजेआई ने उन्हें याचिका दाखिल करने की सलाह दी थी; 12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन ने अदालत की ओर मार्च किया और याचिका दाखिल की।

वागले ने सीजेआई के फैसले की एक खबर पर एक्स पर चीफ जस्टिस के लिए अपशब्द भरी पोस्ट लिखी। राउत ने 12 अक्टूबर को अपनी टिप्पणी में कहा कि जज भाजपा शासित राज्यों में भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में गए और मुख्यमंत्रियों ने जजों के लिए दावतें दीं। एससीबीए की याचिका के मुताबिक उन्होंने लंदन में राजनीतिक हस्तियों के साथ बैडमिंटन खेलते जजों की तस्वीरों का भी ज़िक्र किया। दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) 19 जून के आदेश में पहले ही पा चुका था कि वे तस्वीरें नवंबर 2025 में नई दिल्ली के एक कार्यक्रम की हैं, और उन्हें हटाने का निर्देश दिया था।

अटॉर्नी जनरल की राय

अपने सहमति पत्र में वेंकटरमणी ने इन पोस्ट को “प्रथम दृष्टया अपमानजनक” बताया और कहा कि इनका मकसद सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा गिराना था। उन्होंने वागले की पोस्ट को अपमानजनक और निचले स्तर का बताया। राउत के बारे में उन्होंने कहा कि जजों और दावतों से जुड़े दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, और याद दिलाया कि तस्वीरों पर हाईकोर्ट का आदेश सांसद के बयान से पहले आ चुका था।

अटॉर्नी जनरल ने लिखा, “यह ज़रूरी है कि माननीय सांसद को तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए थी।”

एससीबीए ने अदालत से दोनों पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई करने, एक्स कॉर्प, मेटा, गूगल और समाचार एजेंसी आईएएनएस को पोस्ट, वीडियो और खातों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने, और केस लंबित रहने तक दोनों को सीजेआई व अन्य जजों पर ऐसे आरोप लगाने से रोकने की मांग की है। बार निकाय ने कहा कि उसे न्यायपालिका की निष्पक्ष आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है। याचिका में कहा गया है, “प्रतिवादियों द्वारा जानबूझकर इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्द/अभिव्यक्तियां निष्पक्ष आलोचना से आगे जाती हैं।”

एक माफी, एक चुप्पी

वागले ने तुरंत कदम उठाया। गुरुवार को उन्होंने एक्स पर अटॉर्नी जनरल को लिखा पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी, बताया कि पोस्ट हटा दी है और अनुरोध किया कि मामला आगे न बढ़ाया जाए। शुक्रवार सुबह तक राउत की ओर से कोई जवाब नहीं आया था।

यह मामला ऐसे हफ्ते में आया है जब अदालत और विपक्ष के रिश्तों में तनाव है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं के 12 अक्टूबर के मार्च के खिलाफ एक याचिका पर नोटिस जारी किया, और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने अलग से जजों पर निजी हमलों की निंदा की है।