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गौरव गोगोई बोले, चुनाव आयोग 'पूरी तरह मैनेज'; मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
गुवाहाटी में असम कांग्रेस प्रमुख ने ज्ञानेश कुमार पर मोदी और शाह के प्रति वफादारी का आरोप लगाया और जुबीन गर्ग जांच को लेकर हिमंत बिस्वा सरमा सरकार पर निशाना साधा।

मुख्य बातें
- गोगोई ने कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक ताकत खोखली कर दी गई है।
- उन्होंने कहा कि विपक्ष की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैलियां देशभर में जारी हैं।
- उन्होंने आरोप लगाया कि जुबीन गर्ग की मौत की जांच कर रही एसआईटी ने अदालत में सारे सबूत नहीं रखे।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर संविधान के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सेवा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक ताकत खोखली कर दी गई है।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोगोई ने गुवाहाटी में कहा, “हर दिन हमें खबरें मिल रही हैं कि भारत का चुनाव आयोग पूरी तरह मैनेज कर लिया गया है।” उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है जैसे उस अधिकारी, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शपथ ही नहीं ली है।” और अंत में कहा, “उस व्यक्ति, ज्ञानेश कुमार को जाना होगा।”
गोगोई ने कहा कि नवरात्र, दशहरा और दुर्गा पूजा के दौरान रुका पार्टी का काम फिर शुरू हो गया है, और विपक्ष की “वोट बचाओ, देश बचाओ” रैलियां देशभर में चल रही हैं। खबरों के मुताबिक इंडिया गठबंधन 28 अक्टूबर को मॉक संसद की योजना भी बना रहा है, जिसका ब्योरा अभी तय हो रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का बार-बार राहुल गांधी का जिक्र करना दिखाता है कि वे उन्हीं में उलझे हैं, जबकि मोदी को मणिपुर और सूखा प्रभावित इलाकों पर बात करनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या सरकार 2029 तक चल पाएगी, और इसे “दृष्टि का दिवालियापन” बताया।
जुबीन गर्ग मामले पर
असम की बात करते हुए गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में न्याय दिलाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अदालत के सामने सारे तथ्य और सबूत नहीं रखे और गिरफ्तार लोग एक के बाद एक जमानत पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों में आशंका है कि हिमंत बिस्वा सरमा की बनाई एसआईटी न्याय दिलाने के लिए नहीं बनी थी।” उनके मुताबिक यह नाकामी सरमा के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा दाग होगी।
चुनाव आयोग या असम सरकार की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।