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कपिल सिब्बल का मोहन भागवत को जवाब: देश सरकार बदलना चाहता है, लोकतांत्रिक तरीके से
राज्यसभा सांसद ने आरएसएस प्रमुख की 'सत्ता परिवर्तन' की कोशिशों वाली चेतावनी पर पलटवार किया और कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के पास न लाठी थी, न बंदूक, न पत्थर।

मुख्य बातें
- कपिल सिब्बल ने भागवत को जवाब दिया, "भारत लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलना चाहता है"।
- भागवत ने नागपुर में 20 अक्टूबर के विजयादशमी भाषण में सत्ता बदलने की कोशिशों के खिलाफ चेताया था।
- सिब्बल ने दिल्ली में 2 से 23 अक्टूबर के बीच दर्ज 57 एफआईआर की जांच पर सवाल उठाए।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को आरएसएस प्रमुख की “सत्ता परिवर्तन” वाली चेतावनी उन्हीं पर पलट दी। उन्होंने कहा कि आम भारतीय बस वोट से सरकार बदलना चाहते हैं।
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा, “भारत लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलना चाहता है।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि मोहन भागवत यह समझते हैं, लेकिन मानना नहीं चाहते।”
भागवत ने 20 अक्टूबर को नागपुर के रेशिमबाग मैदान में विजयादशमी संबोधन में, जो आरएसएस के शताब्दी वर्ष का समापन भी था, सत्ता बदलने की कोशिशों की बात की थी। उन्होंने कहा था कि “आसुरी शक्तियां” भारत, हिंदुओं और संघ को तोड़ने में लगी हैं और राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाले लोग उन्हें समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया था कि प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां समाज को न बांटें। यह भाषण मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्ष की मांग के बीच आया था।
‘किसी के पास लाठी नहीं थी’
सिब्बल ने कहा कि विदेशों के हिंसक विद्रोहों से तुलना ठीक नहीं है। जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के बारे में उन्होंने कहा, “उनमें से किसी के पास लाठी, बंदूक या पत्थर नहीं थे।”
उन्होंने आरोप उलटकर संघ पर लगाया। उन्होंने कहा, “जब आरएसएस ने केजरीवाल का साथ दिया था, तब वह खुद सत्ता परिवर्तन में सक्रिय भागीदार था।” उन्होंने संघ पर केवल विरोधियों को कठघरे में खड़ा करने का आरोप लगाया। “आप कभी मोदी सरकार या उन राज्य सरकारों को दोष नहीं देते जहां आप सत्ता में हैं, क्योंकि इसमें हितों का टकराव है।”
उन्होंने पूछा कि अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख में घुसपैठ पर आरएसएस चुप क्यों रहा। अरुणाचल पर आईटीबीपी के हालिया बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आप उनका बयान यूट्यूब से हटा सकते हैं। आप उन लोगों को नहीं हटा सकते जिन्होंने हमारी जमीन पर कब्जा कर रखा है।” अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दौरे को उन्होंने “बेहद अपमानजनक” बताया, हालांकि विस्तार में नहीं गए।
एफआईआर का सवाल
सिब्बल ने राजधानी में प्रदर्शनों से निपटने के पुलिस के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि 2 से 23 अक्टूबर के बीच दर्ज 57 एफआईआर की जांच कैसे हुई और उन्हें क्राइम ब्रांच को क्यों सौंपा गया। उन्होंने कहा, “वे किसी का नाम लिए बिना एफआईआर दर्ज कर लेते हैं।”
दशहरे पर पुतले जलाने पर भी उन्होंने तंज कसा। उन्होंने कहा, “अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो चंदा चोरों का पुतला जलाते।”
आगे क्या
दोपहर तक भाजपा या आरएसएस की ओर से सिब्बल को कोई जवाब नहीं आया था। इस बयानबाजी से प्रदर्शनों पर बहस और तीखी हुई है। इसी महीने भाजपा ने एक आइसा नेता के बांग्लादेश के युवा आंदोलन की तारीफ करने के बाद राहुल गांधी पर “सत्ता परिवर्तन” चाहने का आरोप लगाया था।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली अगली बड़ी परीक्षा है। सिब्बल ने कहा कि उन्हें यह बदलाव मतपेटी से आने की उम्मीद है। “मुझे लगता है कि भारत की जनता तय कर चुकी है कि बदलाव होगा, और वह पूरी तरह शांति से होगा।”