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आंध्र निकाय चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची रोकी, नामांकन की मोहलत पर फैसला करने को कहा
हिंसा के कारण उम्मीदवारों को नामांकन से रोके जाने की वाईएसआरसीपी की शिकायत पर अवकाश पीठ ने राज्य चुनाव आयोग से गुरुवार तक तय करने को कहा कि नामांकन दोबारा खोले जाएं या नहीं।

मुख्य बातें
- राज्य चुनाव आयोग उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक रोककर रखेगा।
- जहां रुकावट की शिकायतें सही पाई जाएं, वहां नामांकन कम से कम 48 घंटे के लिए फिर खुलेंगे।
- पुलिस प्रमुख नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा और सीसीटीवी का इंतज़ाम करेंगे; अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग से कहा कि वह नगर निकाय चुनावों के उम्मीदवारों की अंतिम सूची फिलहाल जारी न करे और जल्द तय करे कि जिन जगहों पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को कथित तौर पर बलपूर्वक नामांकन से रोका गया, वहां नामांकन दोबारा खोले जाएं या नहीं।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की अवकाश पीठ ने कहा कि बुधवार को जारी होने वाली सूची अब 25 अक्टूबर तक प्रकाशित की जा सकती है। इस बीच आयोग नामांकन केंद्रों पर हिंसा या रुकावट की हर शिकायत की अलग-अलग जांच करेगा, और जहां शिकायत सही पाई जाए, वहां फैसला प्रकाशित होने के समय से उम्मीदवारों को कम से कम 48 घंटे और देगा।
पीठ ने कहा, “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। चुनाव प्रक्रिया में भरोसा जगाना संवैधानिक लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी है।”
वाईएसआरसीपी ने अदालत से क्या कहा
वाईएसआरसीपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि 16 से 18 अक्टूबर की तीन दिन की नामांकन अवधि में 19 नगर निकायों में पार्टी के लगभग दो-तिहाई उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोका गया। उन्होंने पहले दिन पुंगनूर और रायचोटी में हुई हिंसा, कडपा में फाड़े गए नामांकन पत्रों और तिरुपति के उन नौ उम्मीदवारों का हवाला दिया जिनका कहना है कि उन्हें निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि गाड़ियां जलाई गईं और एक सांसद के कर्मचारियों पर हमला हुआ, और चेतावनी दी कि कई वार्डों में सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा सकते हैं।
सिंह ने पीठ से कहा, “ये वीडियो क्लिप हैं जो मैं माननीय न्यायाधीशों को दिखाना चाहता हूं।” उन्होंने पूछा, “जिस वार्ड में मेरे दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म ही फाड़ दिया गया, वहां मैं सबूत कैसे दूं?”
राज्य सरकार और आयोग का विरोध
आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने दलील दी कि चुनाव कराना केवल आयोग का काम है और उन्होंने अदालत के आदेश से मोहलत बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर को हाई कोर्ट में पहली सुनवाई के समय पार्टी ने अधिक समय नहीं मांगा था।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और मुकुल रोहतगी ने याचिका का विरोध किया। लूथरा ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी हिंसा भड़काने के लिए पंजाब से लोग लाई, जबकि रोहतगी ने कहा कि पार्टी मीडिया में एक कहानी गढ़ने की कोशिश कर रही है।
जस्टिस बागची इस दलील से सहमत नहीं दिखे कि आयोग के पास कुछ करने की गुंजाइश नहीं थी। उन्होंने आयोग के वकील से कहा, “उन्होंने 16 तारीख को ही गुहार लगाई थी,” और जोड़ा कि आयोग “आसानी से कम से कम 20 तारीख तक का समय दे सकता था।” उन्होंने ध्यान दिलाया कि आयोग के अपने नियम 14 अक्टूबर की अधिसूचना से छह दिन तक तारीख बढ़ाने की अनुमति देते हैं।
पीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद अदालतें आम तौर पर दखल नहीं देतीं, लेकिन चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष रखने के लिए ज़रूरत हो तो हस्तक्षेप कर सकती हैं। पीठ ने यह भी साफ किया कि वह आयोग की भूमिका अपने हाथ में नहीं लेगी।
पुलिस को उम्मीदवारों की सुरक्षा का निर्देश
पुलिस महानिदेशक को पर्याप्त बल तैनात रखने, नामांकन केंद्रों और चुनाव कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और आयोग के निर्देश के अनुसार नामांकन भरने वालों को सुरक्षा देने को कहा गया है। आयोग और पुलिस प्रमुख दोनों को 27 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है।
हाई कोर्ट ने पार्टी को दो बार लौटा दिया था: 15 अक्टूबर को एकल न्यायाधीश ने याचिका खारिज की और 18 अक्टूबर को खंडपीठ ने एक दिन की मोहलत देने से भी इनकार कर दिया।
वाईएसआरसीपी प्रवक्ता कोंडा राजीव गांधी ने आदेश को “लोकतंत्र और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत” बताया। उन्होंने कहा, “हमारे उम्मीदवारों पर हमले हो रहे हैं, उन्हें धमकाया जा रहा है और नामांकन भरने से रोका जा रहा है। नायडू को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने चाहिए।”
मतदान 28 अक्टूबर को होना है और मतगणना 30 अक्टूबर को होगी।