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12 अक्टूबर के मार्च में राहुल गांधी पर गर्भवती पत्रकार को धक्का देने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने यह अर्जी तब रखी, जब एक दिन पहले अदालत ने उनकी मौखिक शिकायत पर कार्रवाई से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा कि वह इस महीने के आखिर में मामले की जांच करेगी।

मुख्य बातें
- पीठ उस अर्जी पर सुनवाई को राजी हुई जिसमें नेता प्रतिपक्ष पर अदालत परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप है।
- गुरुवार को सीजेआई ने कहा था कि अदालत "मौखिक दलील पर स्वतः संज्ञान नहीं" लेगी।
- अर्जी पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) शुक्रवार को उस अर्जी पर सुनवाई के लिए राजी हो गया, जिसमें आरोप है कि 12 अक्टूबर के विपक्षी मार्च के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अदालत परिसर के भीतर एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया।
वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने अर्जी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट परिसर में राहुल गांधी ने एक महिला पत्रकार को धक्का दिया।” उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकार को अस्पताल ले जाना पड़ा। ये अर्जी में लगाए गए आरोप हैं; अदालत ने इन पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
भाटिया ने गुरुवार को दिल्ली प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान यह घटना मौखिक रूप से उठाई थी। पीठ ने तब कार्रवाई से इनकार कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, “मौखिक दलील पर स्वतः संज्ञान नहीं ले रहे। याचिका दायर कीजिए, हम जांच करना चाहेंगे।” अब अर्जी वकील दिगंत मिश्रा की एक लंबित याचिका में दायर की गई है, जिसमें अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक की मांग है।
पीठ ने कहा कि वह अर्जी पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
गुरुवार को अदालत 12 अक्टूबर के मार्च के खिलाफ एक याचिका पर राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस पार्टी और अन्य को नोटिस जारी कर चुकी है। उस दिन विपक्षी नेता चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर करने पैदल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
अदालत में न पत्रकार का नाम लिया गया है, न उनके संस्थान का। कांग्रेस ने इस आरोप पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।