राजनीतिमतदाता सूची
एसआईआर के नाम पर आंध्र के स्थानीय चुनाव नहीं टलेंगे: सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना तक नई सूची न आए तो मौजूदा मतदाता सूची से चुनाव होंगे। बंगाल में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले हटाए गए मतदाताओं की करीब 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं।

मुख्य बातें
- 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव टालने के लिए एसआईआर को आधार नहीं बनाया जा सकता।
- पीठ ने साफ किया कि अगर अधिसूचना से पहले एसआईआर की अंतिम सूची प्रकाशित नहीं होती, तो मौजूदा मतदाता सूची लागू होगी।
- एक अलग मामले में वकीलों ने बताया कि बंगाल के एसआईआर में हटाए गए मतदाताओं की करीब 1.70 लाख अपीलें कोलकाता और हावड़ा से लंबित हैं, जहां नवंबर में नगर निगम चुनाव होने हैं।
- मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बंगाल की याचिका 16 या 29 अक्टूबर को सुनी जा सकती है, और नाम हटवाने वाली अपीलें सबसे आखिर में ली जा सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने 9 अक्टूबर को कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का इस्तेमाल आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव टालने के लिए नहीं किया जा सकता। अगर चुनाव की अधिसूचना से पहले संशोधित सूची प्रकाशित नहीं होती, तो चुनाव मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर होंगे।
उसी दिन इसी पीठ ने पश्चिम बंगाल के एसआईआर में हटाए गए मतदाताओं की अपीलें कोलकाता और हावड़ा के नगर निगम चुनाव से पहले जल्दी निपटाने की याचिका पर विचार करने की बात कही।
आंध्र प्रदेश पर आदेश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) के 1 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ पाका सुरेश की याचिका सुनी। हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 1 जनवरी 2026 की मतदाता सूची के आधार पर ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया, हो सके तो छह हफ्तों के भीतर, शुरू की जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. आर्यमा सुंदरम ने दलील दी कि अगर इस बीच एसआईआर पूरा हो जाता है तो छह हफ्ते वाला निर्देश टिक नहीं सकता। उन्होंने अदालत को बताया कि करीब 44 लाख मतदाताओं के नाम इस आधार पर हटाए गए कि वे मौजूद नहीं हैं, और नए मतदाता जोड़े गए हैं।
राज्य चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है और जब तक भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) नई सूची प्रकाशित नहीं करता, लागू सूची ही चलेगी। राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि वह हाईकोर्ट की छह हफ्ते की समयसीमा में अधिसूचना जारी करने को तैयार है।
पीठ ने कहा कि एसआईआर चुनाव टालने का आधार नहीं हो सकता। उसके स्पष्टीकरण के मुख्य बिंदु:
- अगर एसआईआर पूरा हो जाता है और अधिसूचना से पहले अंतिम सूची प्रकाशित हो जाती है, तो संशोधित सूची इस्तेमाल होगी।
- ऐसा न होने पर चुनाव राज्य के कानूनों के तहत मौजूदा सूची से होंगे।
- चुनाव प्रक्रिया के दौरान चल रहा पुनरीक्षण अपने आप लागू सूची को अमान्य नहीं करता।
पीठ ने यह भी कहा कि चुनाव में रुकावट डालना जनहित में रुकावट डालने के बराबर है। ईसीआई ने आंध्र प्रदेश की एसआईआर की अंतिम सूची 16 अक्टूबर को प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा है।
राज्य के शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल 17 मार्च 2026 को और ग्राम पंचायतों का 2 अप्रैल 2026 को खत्म हो गया था। 1 अक्टूबर के अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मी चरण सेन बनाम ए.के.एम. हसन उज़्ज़मान फैसले का सहारा लिया था, जिसमें कहा गया था कि मतदाता सूची का चल रहा पुनरीक्षण अपने आप में मौजूदा सूची को अमान्य नहीं करता और न ही चुनाव टालने का कारण बनता है।
एसआईआर और स्थानीय चुनाव: अदालत के सामने आंकड़े
- 16 अक्टूबरआंध्र प्रदेश की एसआईआर की अंतिम सूची के लिए ईसीआई की प्रस्तावित तारीख
- 6 हफ्तेआंध्र में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 1 अक्टूबर को तय हाईकोर्ट की समयसीमा
- 1.70 लाखकोलकाता और हावड़ा से हटाए गए मतदाताओं की लंबित अपीलें, जैसा अदालत को बताया गया
- 93%बंगाल में निपटाई गई करीब 1 लाख अपीलों में से मतदाताओं के नाम बहाल होने का हिस्सा, जैसा अदालत को बताया गया
बंगाल: नगर निगम चुनाव से पहले अपीलें
पश्चिम बंगाल के मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों को प्राथमिकता देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की। कोलकाता और हावड़ा में नगर निगम चुनाव नवंबर में होने हैं, और शंकरनारायणन ने कहा कि इनकी अधिसूचना नवंबर के मध्य में आ सकती है।
भूषण ने पीठ को बताया कि दोनों नगर निगम क्षेत्रों से करीब 1.70 लाख अपीलें एसआईआर अपीलीय न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, और जिन अपीलों पर फैसला हुआ उनमें 90% से ज़्यादा मतदाताओं के पक्ष में गईं। उन्होंने अंतरिम आदेश की मांग की ताकि जिनकी अपीलें लंबित हैं वे वोट डाल सकें। शंकरनारायणन ने कहा कि अब तक करीब 1 लाख अपीलें निपटाई गई हैं, जिनमें से 93% में मतदाताओं के नाम सूची में बहाल हुए।
हम उपचुनाव पहले ही चूक गए हैं; अब नगर निगम चुनाव भी चूक जाएंगे।
जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत को “समस्या का पूरा एहसास है”। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दूसरों के नाम हटवाने की मांग वाली अपीलें पीछे की जा सकती हैं और सबसे आखिर में सुनी जा सकती हैं।
आगे क्या
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे देखेंगे कि बंगाल का मामला 16 अक्टूबर को सूचीबद्ध हो सकता है या नहीं, वरना 29 अक्टूबर सबसे अच्छी तारीख होगी। शंकरनारायणन ने बताया कि पश्चिम बंगाल एसआईआर का मुख्य मामला पहले ही 30 अक्टूबर तक टल चुका है।
आंध्र प्रदेश में अधिसूचना की तारीख से तय होगा कि कौन सी सूची इस्तेमाल होगी। 9 अक्टूबर को ही सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए 34% आरक्षण रद्द करने वाले हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील भी खारिज कर दी।