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सीएमआरएल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पिनराई विजयन और परिवार के खिलाफ सतर्कता जांच एक हफ्ते के लिए रोकी, हाई कोर्ट भेजा
अवकाश पीठ ने कहा कि केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी बेटी वीणा टी और पी ए मोहम्मद रियास को उस आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार है जिसके आधार पर सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज हुई।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने अपील का मौका देने के लिए सतर्कता जांच पर सात दिन की रोक लगाई।
- कोर्ट ने हाई कोर्ट खंडपीठ का वह आदेश रद्द किया जिसमें उन्हें अपील की अनुमति नहीं दी गई थी।
- एफआईआर बनी रहेगी, और पीठ ने कहा कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पी ए मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच सात दिन के लिए रोक दी और कहा कि वे उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने के हकदार हैं जिससे यह मामला शुरू हुआ।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की अवकाश पीठ ने केरलम हाई कोर्ट की खंडपीठ का 15 अक्टूबर का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें तीनों को अपील की अनुमति नहीं दी गई थी। पीठ का तर्क था कि जब एकल न्यायाधीश ने उनके खिलाफ संज्ञेय अपराध बनने की बात कही है, तो वे साफ तौर पर पीड़ित पक्ष हैं और उन्हें बाहर नहीं रखा जा सकता।
सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की दर्ज एफआईआर रद्द नहीं हुई है। रोक का मकसद केवल परिवार को अपील दाखिल करने का समय देना है, और पीठ ने कहा कि वह न तो मामले के गुण-दोष पर और न ही हाई कोर्ट से मिलने वाली किसी अंतरिम राहत पर कोई राय दे रही है।
मामला दिल्ली तक कैसे पहुंचा
यह मामला के एम शाहजहां की रिट याचिका से शुरू हुआ। 9 अक्टूबर को हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की साझा की गई जानकारी के आधार पर सतर्कता ब्यूरो को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। ईडी का आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड ने वीणा की अब बंद हो चुकी आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को ₹2.78 करोड़ का भुगतान किया, जिसे वह फर्जी बताता है।
जब परिवार ने अपील करनी चाही तो खंडपीठ ने कहा कि उनका कोई अधिकार नहीं बनता। 16 अक्टूबर को मामला प्रधान न्यायाधीश के सामने उठाया गया और दशहरा अवकाश के दौरान अवकाश पीठ के सामने सूचीबद्ध हुआ।
दलीलें
विजयन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने रोस्टर के बिना और जिन लोगों के नाम थे उन्हें सुने बिना एक तरह की जनहित याचिका सुनी। ईडी की ओर से पेश ज़ोहेब हुसैन ने कहा कि एजेंसी ने धन शोधन कानून की धारा 66(2) के तहत जानकारी इसलिए साझा की क्योंकि उसमें संज्ञेय अपराध सामने आए थे। रिट याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि अदालत के एफआईआर का आदेश देने से पहले आरोपी को सुने जाने का अधिकार नहीं होता, और राज्य ने कहा कि खंडपीठ के अपील पर विचार करने से पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी थी।
जस्टिस बागची ने पूछा कि जब ईडी की जानकारी में याचिकाकर्ताओं के नाम हैं तो उन्हें बाहरी कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा, “हम किसी जांच के खिलाफ नहीं हैं।”
पीठ ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश ने एफआईआर के आदेश से आगे बढ़कर जांच और अंतिम रिपोर्ट का निर्देश दिया, जबकि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत इन कदमों के लिए दूसरी वैधानिक शर्तें पूरी होनी चाहिए।
आगे क्या
अब अपील केरलम हाई कोर्ट की खंडपीठ के सामने जाएगी। अगर खंडपीठ सुरक्षा नहीं बढ़ाती तो सात दिन की रोक खत्म हो जाएगी। विजयन को इससे जुड़े धन शोधन मामले में ईडी ने अलग से 23 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया है।