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शांति मुचलके पर फिर रिहा हुए दिपके, नेहा बोरा ने पूछा: रात भर किस कानून से रोका

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने शनिवार दोपहर सीजेपी संस्थापक को रिहा किया। एक दिन पहले उन्हें कनॉट प्लेस जाते समय रोका गया था। आइसा अध्यक्ष को कुछ घंटे पहले छोड़ा गया।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा (फ़ाइल फ़ोटो)
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: ABP MAJHA / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. शनिवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने अभिजीत दिपके को शांति मुचलके पर सशर्त जमानत दी।
  2. पुलिस ने उन पर बीएनएसएस की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की, जो शांति भंग रोकने के प्रावधान हैं।
  3. नेहा बोरा शनिवार तड़के रिहा हुईं और कहा कि आम नागरिकों से कट्टर अपराधियों जैसा बर्ताव हो रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके शनिवार दोपहर रिहा हो गए। एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उन्हें शांति मुचलके पर सशर्त जमानत दी। करीब 24 घंटे पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें कनॉट प्लेस के “लहरा दो तिरंगा” प्रदर्शन के लिए निकलने से रोक दिया था।

उन्हें मंदिर मार्ग में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। पुलिस ने बताया कि उसने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी। पहली धारा शांति भंग की आशंका होने पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कदम उठाने का अधिकार देती है, दूसरी पुलिस को बिना वारंट एहतियाती गिरफ्तारी की छूट देती है। एक शर्त यह है कि वे एक साल तक शांति बनाए रखेंगे। पूरी शर्तें लिखित आदेश आने पर साफ होंगी।

सीजेपी के कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने एक्स पर लिखा, “अभिजीत दिपके रिहा।”

वकीलों का लंबा इंतजार

दिन की शुरुआत पार्टी की इस शिकायत से हुई कि उसे पता ही नहीं कि दिपके कहां हैं। रत्ना सिंह ने सुबह लिखा, “अभिजीत गिरफ्तार हैं और उन्हें एसईएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। उनकी लोकेशन अब भी पता नहीं, वकील नहीं मिल पाए हैं।” सीजेपी के अजिंक्य शिंदे ने कहा कि आठ घंटे से ज्यादा बीत गए और पार्टी को नहीं बताया गया कि दिपके को कहां और किस आधार पर रखा गया है।

सुनवाई भी देर से हुई। सिंह ने लिखा, “सुनवाई दोपहर 12 बजे होनी थी। दोपहर के 3:38 बज गए हैं और कोई हलचल नहीं।” सुनवाई के दौरान कई वकीलों को मजिस्ट्रेट की अदालत के बाहर सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। सिंह की दलील थी कि गिरफ्तारी गैरकानूनी है और लोगों से तिरंगा फहराने की अपील अपने आप में अपराध नहीं हो सकती। उन्होंने लिखा, “एसईएम कोर्ट को अभिजीत दिपके को रिहा करना चाहिए, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी गैरकानूनी है।”

एक हफ्ते में यह दूसरी बार है जब दिपके को मुचलके से बांधा गया है। 10 अक्टूबर को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत के बाद उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने के मुचलके पर छोड़ा गया था। शुक्रवार को झंडेवालान से उठाए जाने से पहले पुलिस ने उन्हें उसी वचन की याद दिलाने वाला नोटिस दिया था।

“किस कानून से?”

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को शुक्रवार शाम मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें शनिवार तड़के छोड़ा गया। उनकी वकील सुपांथा सिन्हा ने बताया कि उन्हें करीब शाम 5 बजे पकड़ा गया, लेकिन वकीलों को रात करीब 10:30 बजे ही पता चला कि वे कहां हैं। आइसा ने बाद में बताया कि वकील उनसे आरके पुरम थाने में मिले। सिन्हा के मुताबिक पुलिस कमरे में मौजूद रही और अकेले में बात नहीं करने दी। सीपीआई नेता एनी राजा उन्हें खोजते हुए वकीलों के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंची थीं।

रिहाई के बाद बोरा ने कहा, “यह किस अधिकार से सही है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात रोके रखा जा सकता है?” उन्होंने कहा, “आम नागरिकों से कट्टर अपराधियों जैसा बर्ताव किया जाता है, और यह इस देश में लंबे समय से चल रहा है।”

उन्होंने सभी हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और मध्य दिल्ली में पाबंदियां खत्म करने की मांग की, और आंदोलन की दोनों मांगें दोहराईं: “ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाओ और एसआईआर रोको।”

एफआईआर और चेतावनी

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस के आसपास लागू बीएनएसएस की धारा 163 के निषेधाज्ञा आदेशों के कथित उल्लंघन पर कई एफआईआर दर्ज की हैं। उस दिन करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलने पर कभी रोक नहीं थी, लेकिन प्रतिबंधित इलाके में बिना अनुमति भीड़ जुटाने या जुलूस निकालने पर थी। उन्होंने चेतावनी दी कि बार-बार ऐसा करने वालों पर आगे और कार्रवाई होगी।

सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर में घुसने के मामले में 14 अक्टूबर को मिली पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं।