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जंतर-मंतर से दूर रहने का वादा कर तिहाड़ से बाहर आए सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका

दिल्ली के एक मजिस्ट्रेट ने तीन दिन और हिरासत की पुलिस की मांग ठुकराई और कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेताओं को ₹50,000-₹50,000 के बॉन्ड पर रिहा कर दिया। वे आठ दिन से सलाखों के पीछे थे।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. मजिस्ट्रेट ने तीन दिन और न्यायिक हिरासत की पुलिस की मांग खारिज कर दी।
  2. दास और रांका ने लिखकर दिया कि जब तक जंतर-मंतर अधिसूचना से बाहर है, वे वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
  3. दोनों को शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे फिर पेश होना है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका बुधवार शाम तिहाड़ जेल से बाहर आ गए। तिरंगा लेकर जंतर-मंतर का ताला लगा गेट फांदने के आठ दिन बाद उन्हें रिहाई मिली। दिल्ली के एक मजिस्ट्रेट ने उन्हें तीन दिन और जेल में रखने की पुलिस की मांग ठुकरा दी और बॉन्ड पर छोड़ दिया।

विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट रितु राज ने, जो सहायक पुलिस आयुक्त हैं, दोनों को ₹50,000 का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत देने का आदेश दिया। दोनों नेताओं ने लिखित वचन दिया कि वे सार्वजनिक शांति भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर है, तब तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी वादा किया कि आगे के प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में रहेंगे।

मजिस्ट्रेट ने माना कि शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड और लिखित आश्वासन काफी हैं और आगे हिरासत की जरूरत नहीं है। दोनों को अपने जमानतदारों के साथ हर सुनवाई पर हाजिर होना होगा। अगली सुनवाई शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे है, जब जांच अधिकारी को जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट देनी है।

पुलिस क्या चाहती थी

पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत यह निवारक कार्रवाई शुरू की थी। बुधवार को पुलिस ने तीन दिन और न्यायिक हिरासत मांगी। उसने दोनों के पिछले आचरण, मीडिया में दिए बयानों और सार्वजनिक बयानों व अदालत में कही बातों के बीच कथित विरोधाभास का हवाला दिया। पुलिस ने मजिस्ट्रेट से कहा, “उनके पिछले आचरण और वहां प्रदर्शन का आह्वान करने को देखते हुए शांति बनाए रखने को लेकर कुछ आशंकाएं थीं।”

उनके वकील ने अदालत में माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि ऐसा आचरण दोबारा नहीं होगा। इस बीच दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ दूसरा मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

रांका जेल नंबर 4 में और दास जेल नंबर 2 में बंद थे।

हिरासत का लंबा हफ्ता

दोनों को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद। 14 अक्टूबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सोमवार को इसी मजिस्ट्रेट ने उनकी जमानत ठुकराकर हिरासत दो दिन बढ़ा दी थी और कहा था कि उनका आचरण “कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं” दिखाता।

बुधवार सुबह उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) से हिरासत बढ़ाने के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले ली थी। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने सुझाव दिया था कि वे मजिस्ट्रेट के फैसले का इंतजार करें। जज ने कहा था, “क्या यह बेहतर नहीं होगा कि आप इसे वापस लें, देखें कि 2 बजे क्या होता है और फिर कानून के रास्ते पर चलें।”

प्रतिक्रियाएं

सीजेपी के कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने आदेश का स्वागत किया, पर कहा कि यह “पहले आ जाना चाहिए था”। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश दोनों नेताओं के साथ खड़ा है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि दोनों को पहले के शांति बॉन्ड के कथित उल्लंघन के कारण पकड़ा गया था, राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश के लिए नहीं। दास, रांका और पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके गेट फांदने से कुछ ही दिन पहले शांति बनाए रखने के बॉन्ड पर रिहा हुए थे।

सीजेपी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों के केंद्र में रही है।